भारत के विभिन्न नाम कब और कैसे पड़े (इंडिया,हिंदुस्तान,भारतवर्ष )

भारत के विभिन्न नाम है जो समय के साथ पड़ते गए ,इसका कारण है कि हमारा देश बहुत प्राचीन है समय के साथ यहाँ कई राजवंशों ने राज्य किया ,इसके अलावा भारत का संपर्क विदेशो से भी सदा से रहा है। विदेशियों के लिए भारत सदैव आकर्षण का केंद्र रहा है. यहाँ की सभ्यता ,संस्कृति ,रहन -सहन व सम्पन्नता को लोग आश्चर्य की दृष्टि से देखते रहे है। भारत के बारे में तरह-तरह की कल्पनाये करते रहे हैं और इस देश को देखने को लालायित रहे हैं।

आइये जानें भारत के विभिन्न नाम कब और कैसे पड़े :-

भारत वर्ष:-

इस देश का प्राचीन नाम भारत वर्ष है ,इस इस विषय में निश्चित रूप से यह नहीं कहा जा सकता कि इसका नाम भारत कब और कैसे पड़ा क्योंकि विभिन्न प्राचीन ग्रंथों में अलग-अलग मत है।

महाभारत के अनुसार इसका भारतवर्ष नाम हस्तिनापुर के महाराजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रतापी पुत्र भरत के नाम पर पड़ा जो एक चक्रवर्ती राजा थे उन्ही के वंश में भीष्म पितामह व कौरव- पांडव हुए।भरत ऐसे न्यायप्रिय तथा प्रजापालक राजा थे कि अपने पुत्रों को कम योग्य जानकर एक अत्यंत साधारण व्यक्ति को जो योग्य था राजा बना दिया।

भारत का नाम हस्तिनापुर के राजा भरत के नाम पर पड़ा(महाभारत के अनुसार)

भागवत महापुराण जैन ग्रंथों के अनुसार इस देश का भारत नाम स्वयंभू मनु के वंश में उत्पन्न महाराज ऋषभ देव के पुत्र भरत के नाम पर पड़ा।भरत एक महान योगी, प्रजापालक सम्राट थे। वे इतने दयालु थे की उन्होंने जंगल में अकेले मिले एक हिरन के बच्चे को जीवन भर पाला ।यद्दपि वही उनके मुक्ति में बाधक भी हुआ।

ऋषभदेव — भरत

विष्णु पुराण में लिखा है –

  • “उत्तर यत्समुद्रस्य हिताद्रेश्चैव दक्षिणम।
  • वर्ष तत भारतम नाम भारती यत्र सन्ततिः।।”

अर्थात :-

  • जो समुद्र के उत्तर व हिमालय के दक्षिण में है।
  • वह भारत वर्ष (देश ) है और उसकी संताने भारती कहलाती है।

अर्थात भारत का वर्णन हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक है।

मत्स्य पुराण के अनुसार मनु महाराज को प्रजा का भरण- पोषण करने के कारण भरत व इस भूभाग को भारत कहा गया जहाँ उनके द्वारा स्थापित व्यस्था प्रचलित थी।

कुछ विद्धान मानते हैं कि किसी व्यक्ति के नाम पर इतने देश का नाम पड़ना व्यावहारिक नहीं जान पड़ता। यह आर्यों की कोई भरत जाति रही होगी जो राजनैतिक रूप से शक्तिशाली। यह जाति वैदिक सभ्यता के विकास में अग्रणी थी। उसी के नाम पर इस देश का नाम भारत वर्ष पड़ा।

भारत का नाम हिंदुस्तान:-

उसके बाद स्थान आता है हिन्दुस्तान का इसका हिन्दुस्तान नाम ईरानियों का दिया है जो सिंधुनदी के आसपास बसने वालो को हिन्दू (सिंधु का ईरानी नाम ) और इस देश को हिन्दुस्तान कहने लगे। बाद में यहाँ मुसलमान आये जो ईरानी के बदले रूप फ़ारसी से प्रभावित थे उन्होंने भी इसे हिन्दुस्तान पुकारना शुरू किया ,मुसलमानों के शासन के कारण इसका नाम हिन्दुस्तान प्रचलित हुआ।

भारत का नाम इंडिया:-

भारत देश का नाम इंडिया यूनानियों का दिया है। सिंधु नदी को यूनानी लोग इण्डस कहते थे और इसी कारण उसके पास रहने वालो को भी इण्डस या इंडोस कहने लगे। बाद में अंग्रेजी में इण्डिया हो गया। अंग्रेजों के भारत में आने के बाद इसका इंडिया नाम बहुत प्रचलित हुआ। अब संपूर्ण यूरोप में इसे इंडिया कहा जाने लगा व इसके निवासी इंडियन कहलाने लगे.

इस देश का नाम बाहर चाहे जो प्रचलित हुआ हो परन्तु आम जनमानस में इसका नाम भारत ही सर्व स्वीकृत रहा जो धार्मिक अनुष्ठानों में लिया जाता है। यथा :-

श्री श्वेतवराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टविंशतिमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे जम्बूद्वीपे भारतखंडे आर्यवर्तानगत अमुक मासे अमुक तिथे अमुक ग्राम अमुक नाम इत्यादि____

इसे भी देखें:-

सिंधु घाटी सभ्यता का इतिहास

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