गुप्तकालीन मुद्रा

इतिहास कारों का मानना है कि मुद्रा एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य है। मुद्रा के माध्यम से किसी राजवंश या राजा के विषय में काफी जानकारी प्राप्त हो सकती है। गुप्तकालीन मुद्रा से उस समय के बारे में हमें जानकारी प्राप्त होती है।

गुप्त काल की मुद्रा जितनी अधिक परिष्कृत और व्यवस्थित है इतनी और किसी काल की नहीं है भारतीयों के अपेक्षा यूनानी सिक्कों को माप तोल के आधार पर अधिक व्यवस्थित तरीके से बनाते थे बाद में भारतीयों ने अपने सिक्कों में भी सुधार किया ये सिक्के गुप्त काल तक आते-आते अत्यंत उच्च कोटि के हो गए। गुप्त काल के दीर्घकालीन शांति के कारण गुप्त काल में चौमुखी उन्नति हुई। इनके सोने के सिक्के बहुतायत में प्राप्त होते हैं गुप्त काल में सोने चांदी तांबे के सिक्कों पर सम्राटों व देेेवी देवताओं के चित्र उकेरे गए। गुप्त कालीन सोने के सिक्कों को सुवर्ण ,निष्क व चांदी के सिक्कों को आइये इस काल के सिक्कों के बारे में जानते हैं –

चन्द्रगुप्त प्रथम के सिक्के:-

चन्द्रगुप्त प्रथम राजदंपति (सोने के सिक्के )

सबसे पहला गुप्तकालीन सिक्का चंद्रगुप्त प्रथम का प्राप्त होता है जिसमें एक तरफ चंद्रगुप्त का चित्र बना है उसके बाएं हाथ में ध्वजा और दाएं हाथ में अंगूठी है और वह अपने सामने खड़ी रानी कुमार देवी को उस अंगूठी को दे रहा है उसके दाहिनी तरफ श्रीकुमार देवी और बाईं ओर चंद्रगुप्त लिखा हुआ है। सिक्के के दूसरे पट पर लक्ष्मी का चित्र है जो शेर पर सवार है और उनके पैर के नीचे कमल है तथा वहीं पर लिच्छवयः लिखा है।ये सिक्के सोने के हैं और इनका वजन 111 ग्रेन  है।

इसे भी देखें:-

गुप्त वंश का प्रारंभ और प्रारंभिक शासक

समुद्रगुप्त के सिक्के:-

इन्होंने कई प्रकार के सिक्के चलाये, इन सिक्कों की धातु सोना और तांबा है।

समुद्रगुप्त के सिक्के अलंकार पूर्ण हैं इनपर अनेकों प्रकार के चित्र अलंकृत हैं जिनमें-

समुद्रगुप्त के अश्वमेध शैली के सोने के सिक्के

समुद्रगुप्त के अश्वमेध शैली के सिक्के हैं जिन्हें समुद्रगुप्त ने अश्वमेध यज्ञ के उपलक्ष में जारी किया था सिक्कों के एक तरफ यज्ञ से बंधा हुआ अश्व का चित्र है और उसके चारों ओर गोलाई में राजाधिराज: पृथ्वीम विजित्वा दिवम जयत्याहृतवाजिमेघ: लिखा है तथा दूसरी तरफ चंवर डुलाती हुई राजमहिषी का चित्र है और अश्वमेध पराक्रमः लिखा हुआ है।

समुद्रगुप्त के अन्य प्रकार के सिक्के में वह वीणा बजा रहा है और चारों ओर गोलाई में महाराजाधिराज श्री समुद्रगुप्त लिखा है तथा पिछले भाग पर आसन पर विराजमान एक देवी का चित्र है जिसके पास ही समुद्रगुप्त: अंकित है।

इसके अलावा समुद्रगुप्त के गरुड़ध्वज अंकित सिक्के हैं जिसमे वह पाजामा पहने हुए है तथा सिर पर मुकुट है और हाथ में दंड धारण किये हुए है। उसके बाएं हाथ में ध्वजा और दाहिने हाथ के नीचे समुद्र लिखा हुआ है ,सिक्के की दूसरी तरफ सिंहासन पर विराजमान लक्ष्मी का चित्र उत्कीर्ण है और उसके पास ही पराक्रमः लिखा है।

परशु लिए समुद्रगुप्त के चित्र से अंकित सिक्के में सम्राट परशु लिए खड़ा है उसकी दाहिनी तरफ एक बौना व्यक्ति खड़ा है और बाईं और समुद्र लिखा है तथा गोलाई में कृतान्त परशुरजयात्यजित राजजेताजितः अंकित है। सिक्के के दूसरे पट पर सिंहासन पर विराजमान लक्ष्मी का चित्र उत्कीर्ण है कृतान्तः परशुः लिखा है।

समुद्रगुप्त धनुर्धर (सोने के सिक्के )

धनुष बाण लिए सिक्के में सम्राट बाघ को पराजित करती हुई मुद्रा में है और दूसरी तरफ हाथ में कमल धारण किये हुए मगर पर सवार गंगा का चित्र है।

समुद्रगुप्त के प्राप्त सोने के सिक्कों की माप 118 ग्रेन के आसपास है।

इसके अलावा इसके दो तांबे के सिक्के प्राप्त हुए हैं जिनके ऊपर समुद्र लिखा है और गरुण का चित्र बना है।

चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के सिक्के:-

चंद्रगुप्त द्वितीय के कई प्रकार के सिक्के प्राप्त होते हैं ये सोने चांदी और तांबे के हैं।

चन्द्रगुप्त द्वितीय चक्र विक्रम(सोने के सिक्के )

इसमें एक प्रकार के सिक्के पर राजा का चित्र खड़ी मुद्रा में है उसका एक हाथ तलवार की मूठ पर है और उसके पीछे एक वामन व्यक्ति क्षत्र पकड़ा हुआ है और सिक्के के दूसरी तरफ कमल पर खड़ी लक्ष्मी का चित्र है।

चन्द्रगुप्त द्वितीय सिंह निहन्ता (सोने के सिक्के )

अन्य प्रकार के सिक्कों में सम्राट को सिंह से युद्ध करते हुए दिखाया गया है और सिक्के के दूसरे पट पर शेर पर आसीन लक्ष्मी का चित्र उत्कीर्ण है।

चन्द्रगुप्त द्वितीय अश्वारोही (सोने के सिक्के)

अन्य प्रकार के सिक्के पर सम्राट घोड़े पर सवार है और दूसरी ओर हाथ में कमल किये देवी आसन पर विराजमान हैं।

चन्द्रगुप्त द्वितीय धनुर्धर (सोने के सिक्के )

इसके अलावा चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के धनुर्धर प्रकार के सिक्के प्राप्त हुए है जिसमे सम्राट बाएं हाथ में धनुष और दाहिने हाथ में ध्वजा लिए खड़ा है और दूसरी तरफ कमल पर आसीन लक्ष्मी की मूर्ति अंकित है।

चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के सिक्कों पर महाराजाधिराज चन्द्रगुप्त ,विक्रमादित्यः ,नरेन्द्रसिंह: आदि उपाधियाँ लिखी हैं।

चंद्रगुप्त द्वितीय के  सोने के सिक्कों की माप 121, 125 और 132 ग्रेन हैं।
चंद्रगुप्त की विक्रमादित्य की चांदी के सिक्कों पर सम्राट के कमर से ऊपर के शरीर का चित्र है और दूसरी तरफ गरुड़ का चित्र इस पर परम भागवत महाराजाधिराज श्री चंद्रगुप्त विक्रमादित्य अंकित है।

चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के कुछ तांबे के सिक्के भी प्राप्त हुए हैं जिनपर गरुड़ का चित्र उत्कीर्ण है।

कुमारगुप्त के सिक्के:-

कुमारगुप्त के सिक्के सबसे अधिक कलात्मक प्रकार के हैं।

कुमारगुप्त अश्वमेध (सोने के सिक्के )

कुमारगुप्त के अश्वमेध प्रकार के सिक्के पर एक तरफ यज्ञ का अश्व बंधा है और दूसरी तरफ राजमहिषी का चित्र उत्कीर्ण है।

कुमारगुप्त के धनुर्धर प्रकार के सिक्के भी प्राप्त हुए हैं।

कुमारगुप्त प्रथम अप्रतिघ (सोने के सिक्के )

अप्रतिघ प्रकार के सिक्कों में एक तरफ राजा(संभवतया) खड़ी मुद्रा में है उसके दाहिने हाथ की तरफ एक पुरुष और बाएं हाथ की तरफ एक स्त्री खड़ी है। सिक्के के दूसरी तरफ कमल पर आसीन लक्ष्मी है तथा अप्रतिघ लिखा है

इसके अलावा अन्य प्रकार के सिक्कों पर सिंह से युद्ध करते हुए  सम्राट का चित्र और दूसरी तरफ सिंह पर आसीन दुर्गा का चित्र अंकित है।

कुमारगुप्त का राजा रानी  प्रकार के सिक्के प्राप्त हुए हैं जिसमें वृद्ध राजा और युवती रानी का चित्र उत्तीर्ण है।

कुमारगुप्त प्रथम कार्तिकेय (सोने के सिक्के )

अन्य प्रकार की सिक्कों में कुमारगुप्त का मोर को फल खिलाते हुए चित्र है इसकी दूसरी तरफ मयूर पर बैठे हुए कुमार कार्तिकेय का चित्र उत्तीर्ण है।

कुमारगुप्त प्रथम अश्वारोही (सोने के सिक्के )

इसके अतिरिक्त अश्वारोही प्रकार के सिक्के भी प्राप्त हुए हैं।

कुमारगुप्त प्रथम (चांदी के सिक्के )

कुमारगुप्त के चांदी और तांबे के भी सिक्के प्राप्त हुए है।

कुमारगुप्त के समय में प्रचलित सिक्कों का वजन 125 और 129 ग्रेन है।

कुमारगुप्त प्रथम के सिक्कों पर कुमारगुप्तो विजयी सिंह महेन्द्रो दिवं जयति और अन्य अनेक उपाधियाँ अंकित हैं।

स्कंदगुप्त के सिक्के:-

स्कंदगुप्त के समय के सिक्के केवल दो प्रकार के हैं 

एक प्रकार के सिक्कों में एक ओर धनुष बाण लिए सम्राट का चित्र है और दूसरी ओर कमल पर आसीन लक्ष्मी का चित्र है।

दूसरे प्रकार के सिक्कों में एक ओर सम्राट और राज महिषी का चित्र है बीच में गरुड़ध्वज है और दूसरी ओर हाथ में कमल लिए देवी का चित्र है।

स्कंदगुप्त के चांदी के सिक्के

स्कंदगुप्त के भी चांदी और तांबे के सिक्के प्राप्त हुए हैं।

अन्य गुप्त शासकों के भी सिक्के प्राप्त हुए हैं जिनमें पुरुगुप्त के सिक्कों पर प्रकाशादित्य लिखा है ,कुमारगुप्त तृतीय के धनुर्धर भांति के सिक्के जिनपर महाराजाधिराज श्री और दूसरे भाग पर श्री क्रमादित्यः लिखा है।

अन्य राजाओं के सिक्के भी हैं और विद्वान उनसे यह अनुमान लगाने में लगे हैं कि संभव है कि वे राजा गुप्तवंशीय हों।

इस प्रकार हमने देखा की गुप्त कालीन सिक्के कितने उच्च कोटि के और कलात्मक हैं।

इन्हे भी देखें:-

उत्तरवर्ती गुप्त शासक

गुप्त शासन का राजनैतिक,सामाजिक और सांस्कृतिक स्वरूप

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